बुद्धिमान कबूतर और लालची लोमड़ी | बच्चों के लिए नैतिक कहानी | Moral Story for Kids
बहुत समय पहले की बात है। हरे-भरे जंगलों के बीच एक शांत और निर्मल नदी बहती थी। उस नदी का पानी इतना साफ था कि नीचे पड़े कंकड़ और रंग-बिरंगी मछलियाँ साफ दिखाई देती थीं। नदी के दोनों किनारों पर ऊँचे-ऊँचे पेड़ थे, जिनकी शाखाओं पर अनेक प्रकार के पक्षी रहते थे। सुबह होते ही उन पक्षियों की मधुर चहचहाहट से पूरा इलाका गूँज उठता था। वहाँ का वातावरण इतना शांत और सुखद था कि देखने वाला मन ही मन खुश हो जाता।
उन्हीं पक्षियों के बीच एक छोटा-सा कबूतर भी रहता था। आकार में भले ही वह छोटा था, लेकिन उसका हृदय बहुत बड़ा था। वह दयालु, ईमानदार और समझदार था। सभी पक्षी उससे बहुत प्रेम करते थे, क्योंकि वह हमेशा दूसरों की मदद करता और कभी किसी के साथ छल-कपट नहीं करता था। अगर किसी चिड़िया का घोंसला टूट जाता या कोई पक्षी घायल हो जाता, तो कबूतर सबसे पहले उसकी सहायता के लिए पहुँच जाता।
नदी के पास ही, झाड़ियों और घने पेड़ों के बीच एक लोमड़ी रहती थी। वह बहुत चालाक और लालची थी। उसकी चालाकी के किस्से पूरे जंगल में मशहूर थे। वह अक्सर किसी न किसी छोटे जानवर को धोखे से फँसाकर अपना शिकार बना लेती थी। कभी मीठी बातों से, तो कभी झूठे वादों से वह मासूम जानवरों को अपने जाल में फँसा लेती। इसी कारण जंगल के छोटे जानवर हमेशा डर में रहते थे। जब भी लोमड़ी का नाम लिया जाता, तो सबके चेहरे पर भय छा जाता।
एक दिन की बात है। गर्मी बहुत ज्यादा थी। सूरज आसमान में आग बरसा रहा था। जंगल के सभी जानवर और पक्षी प्यास से परेशान थे। नदी ही एकमात्र सहारा थी। सुबह से ही पक्षी पानी पीने के लिए नदी के किनारे आने लगे। कबूतर भी अन्य पक्षियों के साथ वहाँ पहुँचा। सभी पक्षी सावधानी से पानी पी रहे थे, क्योंकि उन्हें लोमड़ी का डर था।
तभी अचानक झाड़ियों के पीछे से लोमड़ी बाहर निकली। उसकी आँखों में लालच साफ झलक रहा था। वह हँसते हुए बोली—
“आज तो मेरा खाना खुद चलकर मेरे पास आ गया!”
उसकी आवाज सुनते ही सभी पक्षी घबरा गए। कुछ पक्षी तुरंत उड़ गए, कुछ इधर-उधर भागने लगे। नदी के किनारे अफरा-तफरी मच गई। लेकिन छोटा कबूतर वहीं शांत खड़ा रहा। उसने न तो उड़ने की कोशिश की और न ही डरकर भागा।
लोमड़ी को यह देखकर आश्चर्य हुआ। वह हँसकर बोली—
“क्या तुम उड़ नहीं सकते, छोटे कबूतर? या डर के मारे जम गए हो?”
कबूतर ने बिल्कुल शांत स्वर में उत्तर दिया—
“मैं डर नहीं रहा हूँ। बस सोच रहा हूँ कि इतनी समझदार लोमड़ी क्या सच में इतनी भूखी है कि बिना सोचे-समझे किसी को खा ले?”
कबूतर की बात सुनकर लोमड़ी थोड़ी चौंक गई। उसे उम्मीद नहीं थी कि इतना छोटा पक्षी इतनी समझदारी से बात करेगा। फिर भी वह घमंड में बोली—
“हाँ! मैं बहुत भूखी हूँ और आज तुम ही मेरा स्वादिष्ट भोजन बनोगे।”
कबूतर समझ गया कि अगर उसने डर दिखाया तो उसका अंत निश्चित है। उसने तुरंत अपने दिमाग का इस्तेमाल किया। थोड़ी देर सोचकर वह बोला—
“अगर आप सच में मुझे खाना चाहती हैं, तो पहले मेरे साथ नदी तक चलिए। नदी के पास मेरा एक दोस्त रहता है। वह भी मुझे खाना चाहता था, लेकिन मैंने उसे रोक दिया था। अगर आप उससे ज्यादा तेज और ताकतवर साबित होंगी, तो मैं खुशी-खुशी आपकी शिकार बन जाऊँगा।”
लोमड़ी को अपनी चालाकी और ताकत पर बहुत घमंड था। उसे लगा कि यह छोटा-सा कबूतर उसे बेवकूफ नहीं बना सकता। वह तुरंत मान गई और बोली—
“चलो! मुझे दिखाओ तुम्हारा वह दोस्त कौन है। मैं देखना चाहती हूँ कि मुझसे ताकतवर कौन हो सकता है।”
कबूतर धीरे-धीरे लोमड़ी को नदी के बिल्कुल किनारे ले आया। नदी का पानी शांत था और उसमें आसमान व पेड़ों की परछाइयाँ साफ दिखाई दे रही थीं। कबूतर ने पानी की ओर इशारा करते हुए कहा—
“वह रहा मेरा दोस्त, नीचे पानी में।”
लोमड़ी ने नीचे झाँका। उसे पानी में अपनी ही परछाईं दिखाई दी। लेकिन उसकी समझ पर लालच हावी था। उसे लगा कि सच में कोई दूसरी लोमड़ी पानी में मौजूद है, जो उससे आँखें मिला रही है। उसका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया।
वह चिल्लाकर बोली—
“मुझसे ताकतवर? यह कैसे हो सकता है! मैं अभी इसे सबक सिखाती हूँ!”
गुस्से और घमंड में आकर लोमड़ी ने बिना सोचे-समझे नदी में छलांग लगा दी। लेकिन नदी गहरी थी और उसकी धारा बहुत तेज थी। लोमड़ी तैरना नहीं जानती थी। वह पानी में इधर-उधर बहने लगी। काफी कोशिशों के बाद वह किसी तरह नदी के किनारे पहुँची। थकान से उसका बुरा हाल था। वह जमीन पर गिर पड़ी और हाँफने लगी।
उधर कबूतर सुरक्षित एक पेड़ की डाल पर बैठा सब देख रहा था। उसने शांत स्वर में कहा—
“देखा लोमड़ी बहन, लालच और घमंड हमेशा मुसीबत में डालते हैं। अगर बुद्धि से काम लिया जाए और शांत दिमाग से सोचा जाए, तो हर खतरे से बचा जा सकता है।”
लोमड़ी को अपनी गलती का एहसास हो गया। उसे बहुत शर्मिंदगी महसूस हुई। उसने सिर झुका लिया और बिना कुछ कहे वहाँ से चली गई। उस दिन के बाद उसने कभी किसी छोटे जानवर को नुकसान नहीं पहुँचाया। धीरे-धीरे जंगल के सभी जानवरों का डर खत्म हो गया।
नदी के किनारे फिर से शांति और खुशी लौट आई। पक्षी बिना डर के पानी पीने आने लगे। कबूतर की बुद्धिमानी की चर्चा पूरे जंगल में होने लगी। सभी जानवर उससे सीख लेने लगे कि ताकत से ज्यादा बुद्धि और समझदारी महत्वपूर्ण होती है।
सीख:
लालच और घमंड हमेशा नुकसान पहुँचाते हैं।
समझदारी, धैर्य और शांत दिमाग से हर बड़ी समस्या का भी हल निकाला जा सकता है।
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