माता-पिता की सीख ही जीवन की सच्ची दिशा
शीर्षक: माता-पिता की सीख ही जीवन की सच्ची दिशा एक छोटे से कस्बे में एक साधारण सा परिवार रहता था। परिवार में माता-पिता और उनका एक बेटा था। माता-पिता बहुत मेहनती और ईमानदार थे। पिता एक छोटी सी दुकान चलाते थे और माता घर संभालने के साथ-साथ बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती थीं। वे अमीर नहीं थे, लेकिन उनके घर में प्यार, संस्कार और सच्चाई की बहुत बड़ी पूंजी थी। उनका बेटा बुद्धिमान था, लेकिन थोड़ा लापरवाह भी था। उसे खेलना, दोस्तों के साथ समय बिताना और मोबाइल पर वीडियो देखना बहुत पसंद था। पढ़ाई में वह बुरा नहीं था, लेकिन वह पूरी मेहनत भी नहीं करता था। माता-पिता अक्सर उसे समझाते कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए सिर्फ दिमाग नहीं, बल्कि अनुशासन और अच्छे संस्कार भी जरूरी हैं। एक दिन पिता ने उसे पास बैठाकर कहा, “बेटा, शिक्षा सिर्फ किताबों में नहीं होती। असली शिक्षा वह है जो तुम्हें एक अच्छा इंसान बनाती है।” उस समय बच्चे ने बात तो सुन ली, लेकिन उसकी गहराई को समझ नहीं पाया। कुछ समय बाद स्कूल में वार्षिक परीक्षा की घोषणा हुई। सभी बच्चे तैयारी में लग गए। उसके दोस्त रोज लाइब्रेरी में पढ़ते थे, लेकिन वह सोचता था ...