चतुर खरगोश और शेर की कहानी | Moral Story in Hindi for Kids


परिचय  

बच्चों की कहानियाँ केवल मनोरंजन का साधन नहीं होतीं, बल्कि वे जीवन के महत्वपूर्ण सबक भी सिखाती हैं। इन कहानियों के माध्यम से बच्चे सही और गलत का अंतर समझते हैं, समझदारी से निर्णय लेना सीखते हैं और यह भी जान पाते हैं कि हर समस्या का हल केवल ताकत से नहीं, बल्कि बुद्धि और धैर्य से भी निकाला जा सकता है। आज की यह कहानी एक छोटे लेकिन बहुत चतुर खरगोश और जंगल के घमंडी शेर की है। यह कहानी हमें सिखाती है कि कभी भी किसी को उसकी ताकत के आधार पर कम नहीं आंकना चाहिए, क्योंकि दिमाग की ताकत शरीर की ताकत से कहीं अधिक होती है।  

जंगल का राजा और उसका आतंक  

बहुत समय पहले की बात है। एक बहुत ही घना और हरा-भरा जंगल था। उस जंगल में तरह-तरह के जानवर रहते थे—हिरण, हाथी, बंदर, लोमड़ी, भालू, खरगोश और कई पक्षी। जंगल दिखने में जितना सुंदर था, उतना ही डरावना भी था, क्योंकि वहाँ एक बहुत ही क्रूर और ताकतवर शेर रहता था। वह खुद को जंगल का राजा मानता था और अपनी ताकत के घमंड में किसी पर भी दया नहीं करता था।  

शेर रोज़ जंगल में शिकार करने निकलता। वह बिना जरूरत के भी जानवरों को मार देता और उन्हें खा जाता। छोटे-बड़े सभी जानवर उससे भयभीत रहते थे। कोई भी जानवर चैन से नहीं जी पा रहा था। जंगल में हर तरफ डर और उदासी का माहौल था। माताएँ अपने बच्चों को बाहर जाने से रोकती थीं और जानवर हमेशा इस डर में रहते थे कि अगला शिकार कौन होगा।  

जानवरों की सभा और शेर से समझौता  

एक दिन जंगल के सभी जानवरों ने मिलकर एक सभा बुलाई। सभी बहुत परेशान थे और कोई न कोई उपाय ढूँढना चाहते थे। हाथी ने कहा, “अगर ऐसा ही चलता रहा, तो एक दिन जंगल में कोई भी नहीं बचेगा।” हिरण बोला, “हमें शेर से बात करनी चाहिए।”  

काफी सोच-विचार के बाद सभी जानवर शेर के पास गए। वे बहुत डर रहे थे, लेकिन अपनी जान बचाने के लिए हिम्मत जुटाई। जानवरों ने शेर से विनती करते हुए कहा—  
“हे जंगल के राजा! आप रोज़ हममें से कई जानवरों को मार देते हैं। अगर ऐसा चलता रहा, तो जंगल खाली हो जाएगा। कृपया हम पर दया करें। हम एक समझौता करना चाहते हैं।”  

शेर ने घमंड से पूछा, “कौन सा समझौता?”  

जानवरों ने कहा, “हम रोज़ बारी-बारी से एक जानवर आपके पास खुद भेज देंगे। इस तरह आपको शिकार करने की मेहनत भी नहीं करनी पड़ेगी और बाकी जानवर भी सुरक्षित रहेंगे।”  

शेर ने थोड़ी देर सोचा। उसे यह बात पसंद आई क्योंकि इससे उसे कम मेहनत करनी पड़ेगी। उसने कहा, “ठीक है, लेकिन याद रखना, अगर कोई भी जानवर देर से आया या नियम तोड़ा, तो मैं पूरे जंगल को तबाह कर दूँगा।”  

डरे हुए जानवरों ने हामी भर दी और वहाँ से चले गए।  

खरगोश की बारी और चिंता  

अब रोज़ एक-एक जानवर अपनी बारी आने पर शेर के पास जाने लगा। हर दिन जंगल में मातम छा जाता था। जिस जानवर की बारी होती, उसके परिवार वाले रोते रहते थे। धीरे-धीरे सभी जानवर बहुत दुखी और निराश हो गए।  

एक दिन बारी आई एक छोटे से खरगोश की। वह बहुत ही नन्हा और कमजोर था। सभी जानवरों को लगा कि अब तो उसका बचना नामुमकिन है। खरगोश खुद भी बहुत डर गया था, लेकिन वह समझदार था। उसने सोचा, “अगर मैं डर गया तो कुछ नहीं होगा। मुझे कुछ ऐसा करना होगा जिससे सभी जानवरों की जान बच सके।”  

रास्ते में चलते हुए वह सोचता रहा। तभी उसे एक गहरा कुआँ दिखाई दिया, जिसमें साफ पानी भरा हुआ था। खरगोश ने कुएँ में झाँका और पानी में अपनी परछाई देखी। तभी उसके दिमाग में एक शानदार योजना आई।  

खरगोश की चाल  

खरगोश जानबूझकर शेर के पास देर से पहुँचा। शेर बहुत गुस्से में था। वह दहाड़ते हुए बोला—  
“इतनी देर क्यों कर दी? क्या तुम्हें पता है मैं कितना भूखा हूँ?”  

खरगोश ने डरने का नाटक करते हुए कहा—  
“महाराज, मुझे माफ कर दीजिए। मैं समय पर आ रहा था, लेकिन रास्ते में एक और शेर ने मुझे रोक लिया।”  

यह सुनते ही शेर चौंक गया। “क्या? मेरे जंगल में दूसरा शेर?”  

खरगोश बोला, “हाँ महाराज! वह कह रहा था कि वही इस जंगल का असली राजा है। बड़ी मुश्किल से मैं उससे बचकर यहाँ पहुँचा हूँ।”  

शेर को बहुत गुस्सा आ गया। उसने कहा, “मुझे अभी उस नकली शेर के पास ले चलो। मैं उसे सबक सिखाऊँगा।”  

कुएँ का रहस्य  

खरगोश शेर को उसी कुएँ के पास ले गया। उसने कहा, “महाराज, वही नकली शेर इस कुएँ में रहता है।”  

शेर ने जैसे ही कुएँ में झाँका, उसे पानी में अपनी ही परछाई दिखाई दी। लेकिन उसे लगा कि सच में कोई दूसरा शेर उसे घूर रहा है। शेर ने ज़ोर से दहाड़ मारी। कुएँ में भी दहाड़ की आवाज़ गूँज उठी।  

शेर को लगा कि सामने वाला शेर उसे चुनौती दे रहा है। गुस्से में आकर वह कुएँ में कूद पड़ा। कुआँ बहुत गहरा था। शेर बाहर नहीं निकल सका और वहीं डूबकर मर गया।  

जंगल की खुशी और खरगोश की जीत  

कुछ समय बाद जब शेर वापस नहीं लौटा, तो खरगोश ने सारी बात जंगल के जानवरों को बताई। सभी जानवर खुशी से झूम उठे। जंगल में फिर से शांति और खुशहाली लौट आई।  

सभी जानवरों ने खरगोश को अपना नायक माना। छोटे से खरगोश ने अपनी बुद्धि से पूरे जंगल को बचा लिया था।  

सीख (Moral of the Story)  

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि बुद्धि और धैर्य के आगे ताकत भी हार जाती है। किसी भी समस्या को हल करने के लिए घबराने की बजाय शांत दिमाग से सोचना चाहिए।  

निष्कर्ष  

बच्चों, यह कहानी हमें सिखाती है कि जीवन में मुश्किलें जरूर आती हैं, लेकिन अगर हम समझदारी और साहस से काम लें, तो हर समस्या का समाधान निकल सकता है। कभी भी खुद को कमजोर मत समझो, क्योंकि सही समय पर सही सोच आपको विजेता बना सकती है।  

आपको यह कहानी कैसी लगी? अपने विचार कमेंट में जरूर लिखें।  

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