गाँव का पुराना कुआँ: एक प्रेरणादायक कहानी
उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव में एक पुराना कुआँ था। यह कुआँ लगभग सौ साल पुराना था और गाँव के लोगों के लिए पानी का मुख्य स्रोत हुआ करता था। समय बदल गया, गाँव में पाइपलाइन और पानी की टंकियाँ आ गईं। अब कोई उस कुएँ का उपयोग नहीं करता था। धीरे-धीरे कुआँ उपेक्षित हो गया। उसके आसपास झाड़ियाँ उग आईं और लोग वहाँ जाना भी बंद कर चुके थे। गाँव के कुछ युवाओं का मानना था कि इस पुराने कुएँ को भर देना चाहिए क्योंकि अब इसकी कोई जरूरत नहीं थी। एक दिन गाँव में पंचायत की बैठक बुलाई गई। विषय था कि पुराने कुएँ का क्या किया जाए। अधिकतर लोग उसे बंद करने के पक्ष में थे। तभी गाँव के सबसे बुजुर्ग व्यक्ति, रामदयाल जी, खड़े हुए। उन्होंने कहा, "यह कुआँ केवल पानी का स्रोत नहीं है, यह हमारे गाँव के इतिहास का हिस्सा है।" कुछ लोगों ने उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया। लेकिन रामदयाल जी ने गाँव वालों को एक कहानी सुनाई। उन्होंने बताया कि कई साल पहले गाँव में भयंकर सूखा पड़ा था। तालाब सूख गए थे, हैंडपंप पानी देना बंद कर चुके थे और लोग परेशान थे। उस समय यही पुराना कुआँ पूरे गाँव की प्यास बुझाने का सहारा बना था...