समय की घड़ी और बादलों का डाकिया | Kids Moral Story in Hindi
बहुत समय पहले की बात है, पहाड़ों के बीच बसा हुआ 'गूंजपुर' नाम का एक बहुत ही शांत और प्यारा कस्बा था। वहाँ के लोग बड़े ही समय के पाबंद थे। गूंजपुर में निशु नाम की एक 9 साल की बहुत ही नटखट और जिज्ञासु लड़की रहती थी। निशु को पुरानी और अजीबोगरीब चीज़ें इकट्ठा करने का बहुत शौक था। वह अक्सर कबाड़ की दुकानों या पुराने संदूकों में कुछ न कुछ ढूंढती रहती था। निशु के दादाजी एक घड़ीसाज़ (Clockmaker) थे, जो पुरानी घड़ियों को ठीक किया करते थे। निशु हमेशा उनके पास बैठकर घड़ियों की 'टिक-टिक' आवाज़ सुनती और सोचती, "क्या कोई ऐसी घड़ी हो सकती है जो हमें समय के पार ले जाए?" दादाजी का तहखाना और चमकीली घड़ी एक दिन दादाजी किसी काम से बाहर गए हुए थे। निशु उनके कमरे की सफाई कर रही थी कि तभी उसकी नज़र फर्श पर बने एक गुप्त दरवाज़े पर पड़ी। उसने पहले कभी उसे नहीं देखा था। निशु ने हिम्मत जुटाई और उस दरवाज़े को खोला। नीचे जाने के लिए सीढ़ियां बनी हुई थीं। नीचे एक छोटा सा तहखाना था, जहाँ धूल से सनी हुई पुरानी घड़ियाँ रखी थीं। वहाँ के सबसे आखिरी कोने में, एक मखमली लाल कपड़े के अंदर एक अजीब सी पॉकेट वॉच (Pock...