नन्हा समीर और समय की जादुई घड़ी | बच्चों की प्रेरणादायक हिंदी कहानी
# नन्हा समीर और समय की जादुई घड़ी
## बच्चों के लिए प्रेरणादायक हिंदी कहानी (900+ Words)
ye kahani baccho ko samay jimmedari aur acchai ki saral lekin gehri seekh dene ke irrade se likhi gyi hai
बहुत समय पहले की बात है। भारत के एक छोटे से, शांत और सुंदर कस्बे **ज्ञानपुर** में एक नन्हा लड़का रहता था। उसका नाम **समीर** था। समीर की उम्र केवल 9 साल थी, लेकिन उसकी सोच बहुत गहरी थी। वह बाकी बच्चों की तरह केवल खेल-कूद में ही समय नहीं बिताता था, बल्कि चीज़ों को समझना और उनसे सीखना भी पसंद करता था।
समीर के पापा एक छोटी-सी **घड़ी सुधारने की दुकान** चलाते थे। दुकान बहुत बड़ी नहीं थी, लेकिन वहाँ तरह-तरह की घड़ियाँ थीं—दीवार घड़ियाँ, हाथ की घड़ियाँ, पुरानी पॉकेट वॉच और टूटी-फूटी अलार्म घड़ियाँ। समीर स्कूल से आने के बाद रोज़ पापा की दुकान पर बैठता और ध्यान से देखता कि घड़ियाँ कैसे ठीक की जाती हैं।
समीर को पुरानी चीज़ों से बहुत लगाव था। उसे लगता था कि हर पुरानी चीज़ अपने अंदर कोई न कोई कहानी छुपाए होती है।
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## रहस्यमयी घड़ी का मिलना
एक दिन पापा दुकान की सफ़ाई कर रहे थे। तभी समीर की नज़र दुकान के कोने में पड़ी एक **धूल से भरी, जंग लगी घड़ी** पर पड़ी। वह घड़ी बाकी घड़ियों से बिल्कुल अलग दिख रही थी। उस पर अजीब-अजीब चिन्ह बने थे और उसकी सुइयाँ सामान्य दिशा के बजाय उलटी दिशा में घूम रही थीं।
समीर ने उत्सुकता से पूछा,
“पापा, ये घड़ी किसकी है? मैंने इसे पहले कभी नहीं देखा।”
पापा कुछ देर सोचते रहे, फिर बोले,
“बेटा, ये घड़ी बहुत साल पहले एक रहस्यमयी बाबा देकर गए थे। उन्होंने कहा था कि यह घड़ी बहुत खास है, लेकिन यह तभी चलेगी जब सही समय आएगा।”
समीर की आँखों में चमक आ गई। वह घड़ी उसे बहुत आकर्षित कर रही थी।
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## जादू की शुरुआत
उस रात समीर को नींद नहीं आ रही थी। उसने वह घड़ी अपने तकिए के पास रख ली। जैसे ही रात के **ठीक 12 बजे**, घड़ी ने “टिक… टिक…” की आवाज़ करनी शुरू की।
अचानक पूरे कमरे में तेज़ रोशनी फैल गई।
एक धीमी लेकिन साफ़ आवाज़ आई,
“समीर… क्या तुम सीखने और सही फैसले लेने के लिए तैयार हो?”
समीर डर गया, लेकिन उसने खुद को संभाला और बोला,
“हाँ, मैं तैयार हूँ।”
जैसे ही उसने यह कहा, हवा घूमने लगी और सब कुछ बदल गया।
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## पहला सफर – अतीत की सीख
जब रोशनी कम हुई, तो समीर ने देखा कि वह अपने ही कस्बे में खड़ा है, लेकिन सब कुछ बहुत पुराना लग रहा था। कच्चे घर, बैलगाड़ियाँ और लोग पुराने कपड़े पहने हुए थे।
वहाँ उसने एक गरीब बच्चे को देखा, जो सड़क किनारे बैठा था और दूर से स्कूल को देख रहा था। उसकी आँखों में पढ़ने की चाह साफ़ झलक रही थी।
समीर उसके पास गया और बोला,
“तुम स्कूल क्यों नहीं जाते?”
बच्चे ने उदास होकर कहा,
“मेरे पास किताबें नहीं हैं।”
समीर ने बिना सोचे अपनी किताबें उसे दे दीं।
तभी घड़ी की आवाज़ आई,
“जो ज्ञान बाँटता है, वही सबसे अमीर होता है।”
फिर सब कुछ घूम गया।
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## दूसरा सफर – वर्तमान की परीक्षा
अब समीर खुद को अपने ही समय में एक पार्क में खड़ा पाया। वहाँ कुछ बच्चे एक कमजोर और शांत बच्चे का मज़ाक उड़ा रहे थे।
समीर को यह बिल्कुल अच्छा नहीं लगा। वह आगे बढ़ा और दृढ़ आवाज़ में बोला,
“किसी को कमजोर कहना आसान है, लेकिन उसकी मदद करना बहादुरी है।”
बच्चे शर्मिंदा हो गए और उन्होंने माफी माँगी।
घड़ी बोली,
“साहस वही है, जो गलत के खिलाफ खड़ा हो।”
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## तीसरा सफर – भविष्य की झलक
अब घड़ी ने समीर को भविष्य में पहुँचा दिया। वहाँ का नज़ारा देखकर उसका दिल दुख से भर गया। पेड़ कट चुके थे, नदियाँ सूख गई थीं और लोग उदास थे।
एक बूढ़े व्यक्ति ने कहा,
“अगर बच्चों ने समय रहते प्रकृति की रक्षा की होती, तो आज यह हालत न होती।”
समीर की आँखों में आँसू आ गए।
घड़ी बोली,
“भविष्य, आज के कर्मों से बनता है।”
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## सबसे बड़ा सवाल
घड़ी ने समीर से पूछा,
“अगर तुम्हें मौका मिले, तो तुम क्या बदलना चाहोगे?”
समीर ने पूरे विश्वास से कहा,
“मैं लोगों को समय की कीमत, दया की ताकत और प्रकृति का महत्व सिखाना चाहूँगा।”
तेज़ रोशनी हुई और समीर अपने बिस्तर पर था।
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## नई सुबह, नया समीर
अगली सुबह समीर बदला हुआ था।
वह बच्चों को किताबें देने लगा।
गलत बातों के खिलाफ आवाज़ उठाने लगा।
पेड़ लगाने के लिए दोस्तों को प्रेरित करने लगा।
धीरे-धीरे पूरा कस्बा बदलने लगा।
एक दिन पापा मुस्कराकर बोले,
“लगता है उस घड़ी ने अपना काम कर दिया।”
समीर ने घड़ी की ओर देखा। अब वह एक साधारण घड़ी थी।
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## कहानी से सीख (Moral of the Story)
- समय सबसे कीमती चीज़ है
- सही फैसले भविष्य बनाते हैं
- दया और साहस सबसे बड़ी ताकत हैं
- बच्चे भी दुनिया बदल सकते हैं
**और इस तरह, नन्हा समीर बन गया समय और अच्छाई का सच्चा मित्र।**
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