नन्हा दीपक और सच की ताकत | बच्चों और माता-पिता के लिए प्रेरणादायक नैतिक कहानी
# नन्हा दीपक, उसकी गलती और जीवन की सबसे बड़ी सीख भारत के एक छोटे लेकिन प्यारे से कस्बे का नाम था **सत्यपुर**। यह कस्बा बहुत बड़ा नहीं था, लेकिन यहाँ के लोग दिल के बहुत साफ थे। सुबह होते ही मंदिर की घंटियों की आवाज़, स्कूल जाते बच्चों की हँसी और चाय की दुकानों पर होती बातचीत इस कस्बे को ज़िंदा सा बना देती थी। इसी कस्बे में रहता था नौ साल का एक लड़का, जिसका नाम था **दीपक**। नाम की तरह ही दीपक के अंदर भी उजाला था। वह बहुत होशियार तो नहीं था, लेकिन ईमानदार, समझदार और मदद करने वाला बच्चा था। उसके पिताजी एक छोटी सी स्टेशनरी की दुकान चलाते थे और माँ घर पर बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती थीं। घर में पैसे ज़्यादा नहीं थे, लेकिन संस्कारों की कोई कमी नहीं थी। दीपक की माँ हर रात सोने से पहले उसे एक बात ज़रूर कहती थीं— “बेटा, ज़िंदगी में अगर कुछ भी चुनना पड़े, तो हमेशा सच और मेहनत को चुनना।” ### स्कूल का नया सत्र और एक बड़ी जिम्मेदारी नए सत्र की शुरुआत में दीपक की कक्षा में उसे **क्लास मॉनिटर** बना दिया गया। यह उसके लिए बहुत बड़ी जिम्मेदारी थी। अब उसे बच्चों की गिनती, बोर्ड की सफ़ाई और शिक्षकों की मदद...